How to trade Forex on news

We’ll cover the fundamental price driver in the Forex market: economic news releases. Leading banks, hedge funds and retail traders all look to the news for making their trading decisions.

Why Trade the News on Forex?

Countries around the globe regularly publish statistics tracking areas such as their labour markets, gross domestic product (GDP), retail sales and inflation.

This news provides fresh information on how an economy is performing and strongly influences the price of currencies. Currencies are effectively confidence indicators for countries, so news releases often trigger a high level of volatility in the forex market, creating a variety of opportunities for forex traders.

Most Important News Releases for Forex Trading

Economic news releases vary in the extent to which they impact the market. Economic news from the United States typically moves the market the most, since the U.S. dollar is part of about 90% of all currency transactions.

The most important economic releases for any country are interest rate decisions from central banks, retail sales, inflation figures, unemployment and industrial production.

The forex market’s initial reaction to a news release usually lasts from 30 minutes to two hours, but the broader impact can last for days.

Which Currency Pairs to Trade on Forex

The major currency pairs (EUR/USD, GBP/USD, USD/JPY, USD/CHF) are the most liquid and have the tightest spreads, and for this reason they make a good place to start in trading news releases. This helps to minimise your risk in periods of high volatility.

Using an Economic Calendar for Forex Trading

Economic Calendar

OctaFX global economic calendar is available online, listing the economic news events of the day. Each release is rated as and high, medium or low impact.

Additionally the calendar will list the analyst forecast (consensus number) and the result of the previous release.

Forex traders will watch to see if the actual data hits, misses or exceeds the forecast level. Typically, the most volatility occurs when the data misses analyst expectations by a wide margin.

If the actual data is better than the forecast, the currency typically appreciates. If the release comes in worse than expected, the currency tends to depreciate.

For example, if analysts expected the U.S. unemployment rate to be 5% for the prior month and the figure came in at 4.8%, the better than expected figure would typically boost the US dollar.

Strategies for Forex Trading the News

There are several different approaches to trading the news. Firstly, some forex traders try to forecast ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट what the result of the economic releases will be and place a trade prior to the release based on this.

When predicting economic data there are sometime clues in prior economic releases. For example, in forecasting U.S. jobs data you can use the employment component of PMI reports. If the employment component of the three reports has increased from the previous month, it suggests that the number of new jobs created also increased.

A second strategy of forex trading the news is to wait until the figure has been released and trade based on how the market typically reacts to such a scenario. For example, if U.S. retail sales beat expectations by a wide margin, you might sell EUR/USD, based on anticipated strength in the US dollar.

A third forex news trading strategy does not take the fundamental data into account and simply looks at prior price. In other words, the forex trader does not begin with a directional bias. A common strategy of this kind is to trade breakouts from the prior range as entry levels. This can be done on both a short term intraday basis and a daily ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट basis.

For example, if the prior range in EUR/USD was a high of 1.2530 and a low of 1.2405, a trader might put a buy stop order in at 1.2530 and a sell stop order in at 1.2405. This is done with the expectation that if price breaks out above 1.2530 it will continue to rise, and conversely if it breaks below 1.2405 that it will continue to fall.

News Trading

Risks in Trading the News on Forex

Bid-offer spreads typically widen before major news releases. This increases your cost in getting in and out of the market.

Slippage is another challenge. Slippage occurs when you try to enter the market at a certain price, but due to the extreme volatility after a news release, you ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट actually get filled at a worse price.

Volatility is also a major challenge. Even if you are right about the direction of the market, sometimes the swings are so wild that you can get stopped out of your position.


Forex Trading the news presents an exciting opportunity for traders, given the frequency of releases and the volatility that is generated. Taking the time to study the forex market reaction to various releases will help you better forecast future outcomes and give you the market insight needed to trade successfully.

क्या होता है हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब, सियासत में क्‍या मायने? हिमाचल में कांग्रेस को भी डर

राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाती है. वैसे इस पूरे मामले में घोड़ों को खरीदने और बेचने की बात तो कहीं भी नहीं आती, फिर भी हॉर्स ट्रेडिंग शब्द का इस्तेमाल क्यों किया जाता है. ऐसे में आज हम आपको ये ही बताने जा रहे हैं कि आखिर ये हॉर्स ट्रेडिंग क्या है, इसका इतिहास क्या है और भारतीय राजनीति में उथल-पुथल के दौर में इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है और इस हॉर्स ट्रेडिंग की पूरी कहानी क्या है. (what is horse trading) (Himachal Pradesh Election 2022)

डेस्क रिपोर्ट: हॉर्स ट्रेडिंग. ये वो शब्द है जिसे आपने पिछले कुछ दिनों में कहीं न कहीं जरूर सुना या पढ़ा होगा. अखबार में किसी खबर के हेडलाइन में पढ़ा भी होगा. पिछले कुछ दिनों में हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही कांग्रेस को अपने MLA की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग ) का डर सताने लगा है. इसलिए उसने अभी से अपने विधायकों को बाड़ेबंदी में ले जाने का प्लान तैयार कर लिया है. हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे मुकेश अग्निहोत्री और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू वगैरह इस पर दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से मीटिंग कर चुके हैं. ऐसे में इस शब्द का उपयोग बढ़ गया है. लेकिन इसका मतलब क्या होता है और राजनीति से इसका आखिर क्या लेना-देना है. यहां समझिए. (what is horse trading) (Himachal Pradesh Election 2022)

आखिर इसका मतलब क्या है?: दरअसल, हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब 'घोड़ों की बिक्री' से है. असल में इस शब्द की शुरुआत कैंम्ब्रिज डिक्शनरी से हुई थी. करीब 18वीं शताब्दी में इस शब्द का इस्तेमाल घोड़ों की बिक्री के दौरान व्यापारी करने लगे, लेकिन इसके साथ किस्से जुड़े कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जाने लगे.18वीं शताब्दी की शुरुआत यानी 1820 के करीब जब घोड़ों के व्यापारी अच्छी नस्ल के घोड़ों की खरीद-फरोक्त करते थे और कुछ अच्छा पाने के लिए किसी तरह के जुगाड़ या चालाकी के लिए जो तकनीक अपनाते थे, उसे ही हॉर्स ट्रेडिंग कहा गया. बताया जाता है कि इस दौरान व्यापारी अपने घोड़ों की कहीं पर छुपा देते थे, कहीं पर बांध देते थे या फिर किसी और अस्तबल में पहुंचा देते थे. फिर अपनी चालाकी, पैसों के लेन-देन के दमपर सौदा किया जाता था. (History of Horse Trading) (horse trading in himachal) (Horse Trading In Politics)

इसके अलावा पुराने जमाने में जब भारत के व्यापारी अपने कारिंदों को अरब देश में घोड़े खरीदने के लिए भेजते थे. तो वापस आते वक्त कुछ घोड़े मर जाते थे, लेकिन अपने मालिकों को संतुष्ट करने के लिए वो घोड़ों की पूंछ दिखाकर ही गिनती पूरी कर लिया करते थे. यानी 100 घोड़े खरीदे, तो 90 दिखाए बाकी 10 की पूंछे दिखाकर कहा कि वो तो मर गए. मालिक यकीन कर लेते थे. तो बाद में कारिंदों ने 100 के पैसे लेना शुरू किया और सिर्फ 90 ही घोड़े खरीदे. मतलब 10 घोड़ों का फायदा उठाना शुरू कर दिया. इसे भी हॉर्स ट्रेडिंग के किस्सों से जोड़ा गया.

राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग क्या है?: यूं तो राजनीति में इस शब्द का कोई औचित्य नहीं होता है, लेकिन पिछले कुछ समय में इसका इस्तेमाल बढ़ा है. जब राजनीति में नेता दल बदलते हैं, या फिर किसी चालाकी के कारण कुछ ऐसा खेल रचा जाता है कि दूसरी पार्टी के नेता आपका समर्थन कर दें तब राजनीति में इसे हॉर्स ट्रेडिंग कहा जाता है. भारत में इसे दल-बदलना, दल-बदलू भी कहते हैं. इसको लेकर अपने देश में कानून भी है.

क्या कहता है एंटी डिफेक्शन लॉ (दल-बदल निषेध कानून)?

अनुसूची के दूसरे पैराग्राफ में एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत अयोग्य करार दिए जाने का आधार स्पष्ट किया गया है.

  1. यदि कोई विधायक स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्याग दे.
  2. अगर वह पार्टी द्वारा जारी किए गए निर्देश के खिलाफ जाकर वोट करे या फिर वोटिंग से दूर रहे.
  3. निर्दलीय उम्मीदवार अयोग्य करार दे दिए जाएंगे अगर वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाएं.

एक पार्टी का विलय दूसरी पार्टी में हो सकता है, लेकिन इसके लिए कम से कम पार्टी के दो-तिहाई विधायकों का वोट जरूरी है.

कांग्रेस के कई नेता जता चुके खरीद-फरोख्त की शंका: हिमाचल कांग्रेस के कई नेता बीते एक सप्ताह के दौरान खरीद-फरोख्त की अंदेशा जता चुके हैं. अन्य प्रदेशों के अनुभव को देखते सियासी गलियारों में भी यह चर्चा आम है कि यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाता है और कुछ निर्दलीय जीतकर आते हैं, तो उस सूरत कांग्रेस सरकार बनाने से चूक सकती है. ऐसे में भाजपा के सरकार बनाने के ज्यादा चांस रहेंगे. कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत जरूरी माना जा रहा है.

कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न पाने का तरीका है बास्केट इन्वेस्टिंग, कैसे कम रकम के साथ उठा सकते हैं फायदा

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक मजबूत कंपनियों के पैक लार्ज कैप लीजेंड्स का 7 महीने का रिटर्न 13 प्रतिशत और बैंकिंग पैक का रिटर्न 16 प्रतिशत से अधिक है

कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न पाने का तरीका है बास्केट इन्वेस्टिंग, कैसे कम रकम के साथ उठा सकते हैं फायदा

एक वक्त था जब निवेश (investment) करना पैसे वालों का काम माना जाता था. क्योंकि सौदे आमतौर पर बड़े होते थे और नियमों की कमी की वजह से छोटे निवेशकों के लिये जोखिम भी काफी रहते थे. हालांकि मध्यवर्ग के विकास के साथ बैंकों और निवेश सलाह देने वालों की नजर इस बड़े बाजार पर पड़ी. वहीं नये नियमों के साथ छोटे निवेशकों का निवेश को लेकर भरोसा बढ़ा. जिसके साथ म्यूचुअल फंड्स (mutual funds), एसआईपी, एसईपी जैसे कई विकल्प सामने आए और सफल हुए. जिसमें निवेशकों को बेहद ऊंची रकम लगाने की आवश्यकता नहीं थी और ये रणनीति उनके सीमित जोखिम उठाने के हिसाब से अनुकूल भी थी. रिटेल निवेशकों (retail investor) की तरफ से निवेश करने की इच्छा बढ़ने के साथ बाजार में कई नई रणनीतियां भी उभर कर आईं. इसमें से एक है बास्केट इन्वेस्टिंग. एचडीएफसी पर दी गई जानकारी के आधार पर आज हम आपको बताते हैं कि क्या है ये बास्केट इन्वेस्टिंग और आपके लिये ये कैसे हो सकती है फायदेमंद

क्या होता है बास्केट इन्वेस्टिंग

वीएम फाइनेंशिल ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट के रिसर्च हेड विवेक मित्तल के मुताबिक बास्केट इन्वेस्टिंग बास्केट ट्रेड की पुरानी रणनीति और म्युचुअल फंड्स की खूबियों को मिलाकर बनाई गई है. जहां एक खास थीम या आइडिये पर आधारित कई उभरते या ग्रोथ करने वाले स्टॉक्स की बास्केट बनाई जाती है, जिसमें एक रिटेल निवेशक छोटी रकम के साथ निवेश कर पूरे बास्केट की ग्रोथ का फायदा उठा सकता है. ये बास्केट किसी ग्रुप की कंपनियों, किसी सेक्टर या किसी थीम यहां तक की किसी आइडिये पर आधारित होता है, एचडीएफसी सिक्योरिटीज इसे स्मॉलकेसेज का नाम दिया है, ब्रोकिंग फर्म के मुताबिक स्मॉलकेसेज एक आइडिये पर आधारित स्टॉक का बास्केट होता है.

क्या होता है इस रणनीति का फायदा

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसार इस रणनीति से आप अपना जोखिम कम कर सकते हैं और निवेश को डाइवर्सिफाई कर सकते हैं. इसमें निवेश पर आपको बाजार के जानकारों के अनुभव का फायदा मिलता है, सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें आपका नियंत्रण रहता है. स्टॉक आपके ही पास रहते ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट हैं. आप कभी भी बास्केट को बेच सकते हैं. या फिर लंबी अवधि के दौरान डिविडेंड से लेकर स्टॉक्स में बढ़त का फायदा उठा सकते हैं. इसकी मदद से आप एक क्लिक में कई स्टॉक खरीद सकते हैं और एसआईपी की मदद से भी निवेश कर सकते हैं. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसार इसमे निवेश की शुरुआत के लिये एक छोटी फीस का भुगतान करना होता है. जिसके बाद आप निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

कैसा रहा है स्मॉलकेसेज का प्रदर्शन

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक लार्ज कैप लीजेंड्स जिसमें मजबूत कंपनियों को शामिल किया गया है, का 7 महीने का रिटर्न 13 प्रतिशत से अधिक है. वहीं सुपर पैक 2022 में ऐसे 10 स्टॉक शामिल किये गये हैं जिसमें अर्थव्यवस्था में रिकवरी के साथ तेजी का अनुमान है. फिलहाल इसका 2 महीने में रिटर्न निगेटिव 1 प्रतिशत है. बैंकिंग स्टॉक्स की बास्केट बैंकिंग पैक का 2 साल का सीएजीआर 16 प्रतिशत से ज्यादा है जो कि इन बैंक्स के द्वारा ऑफर की जाने वाली किसी भी एफडी से कहीं ज्यादा है.

कैसे करें निवेश

ऊपर दिये गये उदाहरण से साफ है कि स्मॉलकेसेज छोटी अवधि में नुकसान भी दे रहे हैं हालांकि लंबी अवधि में इनका रिटर्न बेहतर हो रहा है. बास्केट इन्वेस्टिंग एक निवेश की रणनीति है और संभव है कि अलग अलग ब्रोकिंग फर्म इस रणनीति के आधार पर अलग अलग प्रोडक्ट ऑफर कर रहे हों. ऐसे में अगर आप इसमें निवेश करना चाहते हैं तो अपने ब्रोकर से इस बारे मे बात करें और कम जोखिम में बेहतर निवेश की इस रणनीति का फायदा उठायें.

NSE ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट में गड़बड़ी पर सेबी ने मांगी रिपोर्ट: तकनीकी खराबी के बाद 3.45 बजे शुरू हुआ NSE, बीएसई भी 5 बजे तक खुला रहा

शेयर बाजार रेगुलेटर ने NSE से रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट NSE में तकनीकी गड़बड़ी पर मांगी गई है। आज एनएसई सुबह से लाइव अपडेट नहीं कर पाया। सेबी ने एक रिलीज जारी कर कहा है कि एनएसई को यह सलाह दी जाती है कि वह इस मामले में पूरी जानकारी मुहैया कराए।

सेबी ने पूछा, क्यों नहीं डिजास्टर रिकवरी साइट पर कारोबार शिफ्ट किया गया

सेबी ने कहा कि NSE ने डिजास्टर रिकवरी साइट पर कारोबार को क्यों नहीं शिफ्ट किया, इसका भी जवाब दे। यह जवाब एनएसई को जल्दी से जल्दी देने को कहा गया है। सेबी ने कहा कि वह लगातार NSE के साथ संपर्क में इस दौरान था। साथ ही उसे कारोबारी समय बढ़ाने को कहा गया। शेयर बाजार में बुधवार को शाम 5 बजे तक कारोबार हुआ। 3.45 बजे एनएसई में कारोबार शुरू हुआ था। इससे पहले 3.30 बजे प्री ओपन मार्केट कारोबार शुरु हुआ। इसी के साथ बीएसई पर भी 5 बजे तक कारोबार हुआ। इसका कट ऑफ टाइम 5.30 बजे रहा।

सुबह 11.40 को आई थी खराबी

इससे पहले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सिस्टम में सुबह 11:40 बजे खराबी आ गई थी। लोग जिस कीमत पर शेयर खरीदते हैं, वह कीमत एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट दिखना बंद हो गई थी। इस वजह से ट्रेडिंग रोक दी गई। तकनीकी दिक्कत 3.45 को सही हुई। इसके बाद कारोबार का समय बढ़ाने का फैसला हुआ। साथ ही जो भी ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट ऑर्डर आज पेंडिंग थे, उन्हें कैंसल कर दिया गया है।

1 बजे भी नहीं शुरू हो पाया NSE

इस बीच, खबर आई कि 1 बजे NSE में प्री मार्केट शुरू होगा और 1.15 बजे सामान्य कारोबार शुरू होगा। दरअसल प्री मार्केट कारोबार हर दिन सुबह 9 बजे होता है और 9.15 बजे मार्केट चालू हो जाता है। जब इसकी खबर फैली तो NSE ने यह कह दिया कि ऐसा कुछ नहीं है। एक ब्रोकरेज हाउस ने बताया कि आज कारोबार होना मुश्किल है। हालांकि, BSE में कैश सेगमेंट चालू है, इसलिए ट्रेडर या निवेशक वहां पर कारोबार करते रहे।

NSE के लाइव डेटा के अपडेट में आज सुबह से ही दिक्कत आ रही थी। सोशल मीडिया पर रिटेल ट्रेडर और ब्रोकरेज हाउस लगातार इसकी शिकायत कर रहे थे। एक्सचेंज पर इस तरह की समस्या जुलाई 2017 में भी देखने को मिली थी, जब कैश और वायदा सेगमेंट को तकनीकी दिक्कतों के चलते बंद करना पड़ा था।

NSE ने कैश और वायदा सेगमेंट बंद किया

NSE ने इस मामले में कहा कि टेलीकॉम सेवा देने वाली दो कंपनियों के साथ NSE के ढेर सारे लिंक हैं। हमने दोनों कंपनियों से बात की है। हम जल्द ही सिस्टम को फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे हैं। इस वजह से 11.40 बजे से हमारे सभी सेगमेंट बंद हैं।

माक ट्रेडिंग सेशन भी होता है

एक यूजर्स ने लिखा है कि NSE इस तरह की गड़बड़ियों से निपटने और अपने सिस्टम को जांचने के लिए माक ट्रेडिंग सेशन करता रहता है, लेकिन फिर भी ऐसी गड़बड़ियां सामने आती रहती हैं। माक ट्रेडिंग सेशन मतलब अचानक आई गड़बड़ी का पता लगाना और उसे सुलझाना।

सोशल मीडिया पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने कहा कि यहां सभी सेगमेंट में नॉर्मल ट्रेडिंग हो रही।

रिटेल ट्रेडर की नजर लगातार प्राइस फीड ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट पर

रिटेल ट्रेडर लगातार अपडेट हो रहे प्राइस फीड पर नजर गड़ाए रहते हैं। ये ट्रेडर्स सोशल मीडिया पर लगातार इसकी शिकायत करते रहे। सोशल मीडिया पर शिकायतों में कहा गया है कि NSE इंडेक्स का लाइव डेटा अपडेट नहीं हो रहा है। निफ्टी 50, निफ्टी बैंक से जुड़े लाइव अपडेट हासिल करने में परेशानी हो रही है। शिकायत करने वालों ने कहा है कि वे लगातार NSE से संपर्क में हैं।

ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट


नीति आयोग ने आज नया भारत के लिए अपनी व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का खुलासा किया ; जिसमें पहले से की गई प्रगति को स्वीकारते हुए और बाध्यकारी बाधाओं की पहचान करते हुए 41 महत्वपूर्ण क्षेत्रों के विस्तृत विवरण में 2022-23 के लिए स्पष्ट उद्देश्यों को परिभाषित किया गया है और इन घोषित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भावी राह सुझाई गई है।

2022 तक नए भारत की स्थापना के लिए माननीय प्रधान मंत्री के स्पष्ट आह्वान से प्रेरणा और दिशा प्राप्त करते हुए , नीति आयोग ने पिछले वर्ष में ट्रेडिंग रणनीति पर रिपोर्ट कार्यनीतिक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की।

नीति आयोग ने कार्यनीति तैयार करने में एक अत्यंत सहभागी दृष्टिकोण अपनाया। नीति आयोग में प्रत्येक क्षेत्र वर्टिकल में हितधारकों के सभी तीन समूहों अर्थात व्यवसायिक व्यक्तियों , वैज्ञानिकों सहित शिक्षाविदों और सरकारी अधिकारियों के साथ गहन परामर्श हुआ।

इसके बाद वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों , किसानों , नागरिक समाज संगठनों , थिंक-टैंक , मजदूर प्रतिनिधियों और ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ उद्योग के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ आंतरिक परामर्श किया गया।

केंद्रीय मंत्रालयों को इनपुट्स , सुझावों और टिप्पणियों के लिए शामिल किया गया था , जिसमें प्रत्येक अध्याय के मसौदे को परामर्श के लिए परिचालित किया गया था। मसौदा दस्तावेज को उन सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को भी परिचालित किया गया था जिनसे सहकारी संघवाद की भावना को ध्यान में रखते हुए और समावेशी विकास की गाथा लिखने के नीति आयोग के अधिदेश को पूरा करने के लिए बहुमूल्य सुझाव प्राप्त और उन्हें शामिल किया गया।

दस्तावेज़ तैयार करने के दौरान केंद्र , राज्य और जिला स्तर पर सरकार के साथ 800 से अधिक हितधारकों और लगभग 550 बाहरी विशेषज्ञों से सलाह ली गई।

कार्यनीतिक दस्तावेज का व्यापक ध्यान नीति वातावरण को और बेहतर बनाने पर है जिसमें निजी निवेशक और अन्य हितधारक नया भारत 2022 के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अपना पूरा योगदान दे सकते हैं।

आगे बढ़ते हुए , निजी क्षेत्र , नागरिक समाज और नागरिकों को कार्यनीतिक दस्तावेज में उल्लिखित चरणों को पूरा करने के लिए अपनी स्वयं की कार्यनीतियां तैयार करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।

दस्तावेज़ में इकतालीस अध्यायों को चार खंडों के तहत विभाजित कर दिया गया है: उत्प्रेरक अवसंरचना , समावेश और शासन।

रेटिंग: 4.66
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 782